Day 15 श्री राम चरित मानस सुंदरकांड प्रत्येक दोहे चौपाई छंद की व्याख्या
श्रीरामचरितमानस
पञ्चम सोपान – सुन्दरकाण्ड
पंद्रहवां दिन
सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस
राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास॥37॥
से
मम पुर बसि तपसिन्ह पर प्रीती। सठ मिलु जाइ तिन्हहि कहु नीती॥
अस कहि कीन्हेसि चरन प्रहारा। अनुज गहे पद बारहिं बारा॥3॥
तक की विस्तृत व्याख्या