शिव शम्भु भाग २ शिव तत्व
शिवजी के सम्बन्ध में अनेक मत क्यों पाए जाते हैं ?
क्या शिव जी को केवल संहारक कहना उचित हैं?
शिव जी द्वारा धारण किए गए विभिन्न चिन्हों का क्या महत्त्व है?
शिवमहापुराण के अनुसार शिवजी ही परम ईश्वर हैं, समस्त सृष्टि के मूल एवं सभी के आराध्य हैं। सभी देवताओं में प्रधान होने के कारण वह देवों के देव महादेव कहलाते हैं। ‘शिव’, इन दो अक्षरोंके नामका एक बार भी उच्चारण करनेसे मनुष्यके समस्त पाप धुल जाते हैं।
शिवजी के सम्बन्ध में अनेक मत होने का एक कारण तो यह है कि शिवजी के क्रिया कलाप अत्यन्त अद्भुत हैं। दुसरे इसलिए हो सकता है की शिवजी के लीला में विरोधी गुणों का सम्मिश्रण देखा जाता है। तीसरे शिव जी साधारण जन को मोहित करने के लिए वह विचित्र रूप धारण करते हैं ।
आइये जानते हैं कि शिव जी कि शिवजी के क्रिया कलाप अत्यन्त अद्भुत क्यों हैं, शिवजी के लीला में विरोधी गुणों का सम्मिश्रण क्यों पाया जाता है। शिव जी द्वारा विचित्र रूप धारण करने का क्या कारण है।
॥ॐ नम: शिवाय॥
॥ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥