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Hari sharnam

ॐ नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम ।
पुरुषायादिबीजाय परेशायाभिधीमहि ॥

जो जगत के मूल कारण हैं और सब मनुष्यों में आत्मा रूप से विराजमान हैं और समस्त जगत के स्वामी हैं। जिनके कारण इस संसार में चेतना का विस्तार होता है, उन भगवान् का मैं नमन करता हूँ, प्रेम से उनका ध्यान करता हूँ।

यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयं ।
योस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्ये स्वयम्भुवम ॥

यह संसार उन्ही में स्थित है, उन्ही ने इसकी रचना की है, वे ही इसमें व्याप्त हैं तथा स्वयं वे ही इसके रूप में प्रकट हो रहे हैं। यह सब होने पर भी जो इस दृश्य जगत से एवं इसकी कारणभूता प्रकृति से सर्वथा परे एवं श्रेष्ठ हैं, उन स्वयंप्रकाश, स्वयंसिद्ध, सत्तात्मक भगवान् की मैं शरण लेता हूँ।

Author: मनीष

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