शिव शम्भु भाग ३ – परब्रह्म तथा परमात्मा शिव
शिव जी को परब्रह्म तथा परमात्मा क्यों कहा जाता है ?
परमात्म शिव के जागतिक कृत्य क्या हैं
पर ब्रह्म भी शिव हैं तथा परमात्मा भी शिव हैं। शिवमहापुराण में आदि अन्त तथा विकास शून्य परब्रह्म को ही शिव कहा गया है । निराकार ब्रह्म के दो रूपों में विभक्त होने के पश्च्यात लीला से अपनी एक मूर्ति कल्पित की। यह मूर्ति शिवतत्त्व (परमात्म-शिव ) कही गई है। परब्रह्म शिव एवं परमात्म-शिव एक ही सत्ता के द्विविध रूप हैं। एक ही सत्ता का यह भेद शक्ति के कारण होता है।
परमात्म शिव के पंचविध जागतिक कृत्य बतलाये गये हैं – सृष्टि, पालन संहार, तिरोभाव और अनुग्रह।
जो अकेले ही विश्व के बहुत से निष्क्रिय जन्तुओं में सक्रिय हैं अर्थात् जिनके प्रभाव में दृश्यमान जगत् को सक्रियता सम्भव नहीं हो सकती; जो एकाको होते हुये भी बीज को बहुधा करते हैं वही महेश्वर हैं।
॥ ॐ नमः शिवाय ॥
॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय:॥