श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान – सुन्दरकाण्ड ग्यारहवां दिन मोहि न कछु बाँधे कइ लाजा। कीन्ह चहउँ निज प्रभु कर काजा।। से रहा न नगर बसन घृत तेला। बाढ़ी पूँछ कीन्ह कपि खेला॥ तक…Read more
श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान – सुन्दरकाण्ड नौवां दिन करहुँ कृपा प्रभु अस सुनि काना। निर्भर प्रेम मगन हनुमाना।। बार बार नाएसि पद सीसा। बोला बचन जोरि कर कीसा।। से ब्रह्म अस्त्र तेहिं साँधा…Read more
श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान – सुन्दरकाण्ड आठवाँ दिन नर बानरहि संग कहु कैसें। कहि कथा भइ संगति जैसें।। से आसिष दीन्हि रामप्रिय जाना। होहु तात बल सील निधाना।। अजर अमर गुननिधि सुत होहू।…Read more
श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान – सुन्दरकाण्ड छठा दिन पुनि सब कथा बिभीषन कही। जेहि बिधि जनकसुता तहँ रही।। तब हनुमंत कहा सुनु भ्राता। देखी चहउँ जानकी माता।। से चंद्रहास हरु मम परितापं। रघुपति…Read more
श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान – सुन्दरकाण्ड सैल बिसाल देखि एक आगें। ता पर धाइ चढ़ेउ भय त्यागें॥ से तात स्वर्ग अपबर्ग सुख धरिअ तुला एक अंग। तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख…Read more
श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान – सुन्दरकाण्ड सिंधु तीर एक भूधर सुंदर। कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर॥ बार-बार रघुबीर सँभारी। तरकेउ पवनतनय बल भारी॥ से नाना तरु फल फूल सुहाए। खग मृग बृंद देखि…Read more