शिव शम्भु भाग ४ शिवलिंग रहस्य
शिवलिंग क्या है? केवल शिवजी की ही पूजा मूर्ति और लिंग रूप में क्यों की जाती है?
लिंग शब्द का अर्थ है चिन्ह, प्रतीक।
भगवान शिव क्योंकि परमपिता परमात्मा है और स्वयं ब्रह्मस्वरूप हैं इसीलिए निष्काम (निराकार) कहे गए हैं। इसी प्रकार से रूपवान होने के कारण उन्हें सकल (साकार) भी कहा गया है। साक्षात परब्रह्म शिवजी सकल और निष्कल परमात्मा के दोनो रूप हैं।
शिवजी के निष्कल – निराकार होने के कारण ही उनकी पूजा का आधारभूत लिंग भी निराकार ही प्राप्त हुआ है अर्थात शिवलिंग शिव के निराकार स्वरूप का प्रतीक है। यही कारण है शिवजी की पूजा सकल रूप – मूर्ति रूप में और निराकार रूप – चिन्ह रूप में की जाती है।
वन्दे देव उमापतिं सुरुगुरु वन्दे जगत्कारणम,
वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं वन्दे पशूनांपतिम।
वन्दे सूर्य शशांक वहिनयनं वन्चे मुकुन्दप्रिय:,
वन्दे भक्तजनाश्रयं च वरदं वन्दे शिवशंकरम॥
॥ॐ नमः शिवाय॥
॥ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥