Day 18 श्री राम चरित मानस सुंदरकांड प्रत्येक दोहे चौपाई छंद की व्याख्या
श्रीरामचरितमानस
पञ्चम सोपान – सुन्दरकाण्ड
अठारहवां दिन
सुनु कपीस लंकापति बीरा। केहि बिधि तरिअ जलधि गंभीरा॥
संकुल मकर उरग झष जाती। अति अगाध दुस्तर सब भाँति॥3॥
से
करि प्रनामु निज कथा सुनाई। राम कृपाँ आपनि गति पाई॥5॥
रिषि अगस्ति कीं साप भवानी। राछस भयउ रहा मुनि ग्यानी॥
बंदि राम पद बारहिं बारा। मुनि निज आश्रम कहुँ पगु धारा॥6॥
तक की विस्तृत व्याख्या