Naam Ramayan
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥
राम- नाम ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ के समान हैं। मैं सदा रामका स्तवन करता हूं और राम-नाममें ही रमण करता हूं ।
परमेश्वर नामानि संत्यनेकानि।
परन्तु रामनामेदं सर्वेषामुत्तमम॥
परमेश्वर के अनेक नाम हैं परन्तु राम नाम सर्वोत्तम है
बंदउँ नाम राम रघुबर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को॥
बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो॥
मैं श्री रघुनाथजी के नाम ‘राम’ की वंदना करता हूँ, जो अग्नि, भानु सूर्य और चन्द्रमा के हेतु अर्थात् ‘र’ ‘आ’ और ‘म’ रूप से बीज है। वह ‘राम’ नाम ब्रह्मा, विष्णु और शिवरूप है। वह वेदों का प्राण है, निर्गुण, उपमारहित और गुणों का भंडार है॥