श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान – सुन्दरकाण्ड पंद्रहवां दिन सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास॥37॥ से मम पुर बसि तपसिन्ह पर प्रीती। सठ…Read more
श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान – सुन्दरकाण्ड चौदहवां दिन कहु कपि रावन पालित लंका। केहि बिधि दहेउ दुर्ग अति बंका॥ से जितेहु सुरासुर तब श्रम नाहीं। नर बानर केहि लेखे माहीं॥5॥ तक की विस्तृत…Read more
श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान – सुन्दरकाण्ड तेरहवां दिन राम कपिन्ह जब आवत देखा। किएँ काजु मन हरष बिसेषा॥ फटिक सिला बैठे द्वौ भाई। परे सकल कपि चरनन्हि जाई॥ से सावधान मन करि पुनि…Read more
श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान – सुन्दरकाण्ड ग्यारहवां दिन मोहि न कछु बाँधे कइ लाजा। कीन्ह चहउँ निज प्रभु कर काजा।। से रहा न नगर बसन घृत तेला। बाढ़ी पूँछ कीन्ह कपि खेला॥ तक…Read more
श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान – सुन्दरकाण्ड नौवां दिन करहुँ कृपा प्रभु अस सुनि काना। निर्भर प्रेम मगन हनुमाना।। बार बार नाएसि पद सीसा। बोला बचन जोरि कर कीसा।। से ब्रह्म अस्त्र तेहिं साँधा…Read more
श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान – सुन्दरकाण्ड आठवाँ दिन नर बानरहि संग कहु कैसें। कहि कथा भइ संगति जैसें।। से आसिष दीन्हि रामप्रिय जाना। होहु तात बल सील निधाना।। अजर अमर गुननिधि सुत होहू।…Read more